दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने में गुटबाजी बन रही रोड़ा

 भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के नामांकन की आखिरी तारीख 13 मार्च है, लेकिन अभी तक कांग्रेस और भाजपा ने उम्मीदवारों को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस में राज्यसभा के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम प्रमुख रूप से उभरा है, लेकिन खेमेबाजी के चलते इन दोनों नामों पर दांव-पेच चल रहा है। दिग्विजय के दोबारा राज्यसभा में जाने में पार्टी की गुटबाजी ही रोड़ा बन रही है। यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान भी अभी तक कोई निर्णय नहीं कर सका है। उधर, दूसरे राज्यों के नेता भी दिल्ली दरबार में दांव-पेच लगा रहे हैं।

तीन में एक-एक सीट कांग्रेस-भाजपा के खाते में जाना तय

मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों पर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भाजपा के सत्यनारायण जटिया व प्रभात झा का कार्यकाल नौ अप्रैल को पूरा हो रहा है। इन्हीं तीनों सीटों पर 26 मार्च को चुनाव होना है। प्रदेश में विधायकों को जोड़ने-तोड़ने का खेल इसी चुनाव की वजह से भी शुरू हुआ है। कांग्रेस सरकार बनने के बाद बदले समीकरण में कांग्रेस दो और भाजपा एक सीट पर चुनाव जीत सकती है, लेकिन यह विजय उतनी आसान नहीं है।

दिग्विजय सक्रिय, सिंधिया सावधान

राज्यसभा के चुनाव व सत्ता को लेकर ही विधायकों के जोड़-तोड़ का प्रदेश में खेल चल रहा है। इसी कड़ी में कुछ विधायक कुछ दिन से गायब भी हैं। अलबत्ता, विधायकों की वापसी में दिग्विजय की सक्रियता तो दिखी, मगर ज्योतिरादित्य इस मामले में बहुत ही सावधान रहे। जहां मुख्यमंत्री कमलनाथ की परेशानी बढ़ी, वहीं पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को यह संदेश दिया गया कि दिग्विजय सिंह अपनी अहमियत साबित करने के लिए यह खेल कर रहे हैं।

कमलनाथ को साधने में जुटे

मप्र में कमलनाथ, दिग्विजय और ज्योतिरादित्य का खेमा जगजाहिर है। रणनीतिक तौर पर दिग्विजय और सिंधिया के समर्थकों की तरफ से पेशबंदी भी हो रही है। वैसे दिग्विजय हर तरफ से कमलनाथ को साधने में जुटे हैं। विधायकों की वापसी और सरकार पर छाए संकट को दूर करने के नाम पर भी उन्होंने खूब सक्रियता दिखाई। वह दिल्ली से भोपाल लौटे तो कहा कि कमलनाथ के बुलावे पर आए हैं।

सिंधिया प्रदेश में नेतृत्व के इच्छुक

सूत्र यह दावा करने में लगे हैं कि राज्यसभा में पहुंचने के प्रयास में जुटे पार्टी के दूसरे राज्यों के कुछ वरिष्ठ नेता भी हाईकमान तक दिग्विजय के खिलाफ माहौल बनाने में सक्रिय हैं। चर्चा यह भी है कि ज्योतिरादित्य राज्यसभा में जाने के बजाय प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व संभालने की इच्छा पाले हुए हैं। अगर इस तरह फैसला हुआ तो गेम पलट भी सकता है।

प्रियंका कार्ड से खत्म हो सकती दावेदारी

कांग्रेस के दिल्ली दरबार में एक वर्ग प्रियंका गांधी वाड्रा को राज्यसभा में भेजने की हिमायत में जुटा है। यह वर्ग मध्य प्रदेश से प्रियंका को पहला उम्मीदवार बनाने के प्रयास में है। प्रियंका का नाम आने के बाद दूसरी सीट पर पार्टी के उस उम्मीदवार को मौका दिया जाएगा, जो विधायकों को संभाल सके। इसमें चाहे दिग्विजय बाजी मारें या सिंधिया। मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्‍ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस दो सीटों पर जीत के लिए आश्वस्त है। कांग्रेस आलाकमान योग्यता, क्षमता, समय और परिस्थिति के आधार पर उम्मीदवार का चयन करेगा। आलाकमान का फैसला सभी को स्वीकार होगा।

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