अब नहीं होगी कोई टेंशन, कटहल से चार्ज हो सकती हैं मोबाइल फोन की बैट्रियां; जानिए कैसे

सिडनी। कल्पना कीजिए.. कितना अच्छा होता यदि हम पौधों और फलों से बिजली तैयार कर उसका उपयोग कर पाते। बिना किसी अतिरिक्त खर्च के तब हम अपने मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक कारों की बैट्रियां भी चार्ज कर लेते..। अब आपका यह सपना साकार हो सकता है। दरअसल, आस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने एक ऐसा तरीका विकसित किया है जिससे फलों के अवशेषों से बिजली तैयार की जा सकती है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने बिजली तैयार करने के लिए अभी कटहल और डूरियन नामक फलों का ही उपयोग किया है, जिसके उत्साह जनक परिणाम सामने आए हैं।

कटहल और डूरियन से बिजली की जा सकती है स्टोर

यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन जर्नल ऑफ एनर्जी स्टोरेज में प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया गया है कि अब कटहल और डूरियन से बिजली स्टोर की जा सकती है और इसका इस्तेमाल छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज करने के लिए किया जा सकता है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि कैसे ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फलों को सुपर कैपेसिटर में बदला जा सकता है। सुपर-कैपेसिटर ऊर्जा का ऐसा स्रोत होते हैं जो ऊर्जा यानी बिजली का सुचारू रूप से प्रवाह जारी रखते हैं। ये बैटरी की एक छोटी डिवाइस के भीतर बड़ी मात्रा में बिजली का भंडारण कर सकते हैं और फिर कुछ सेकेंड के भीतर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, जैसे मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप को चार्ज करने के लिए बिजली की आपूर्ति भी करते हैं।

ऐसे तैयार की बिजली

ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी में एसोसिएट प्रोफेसर और इस अध्ययन के शोधकर्ता विंसेंट गोम्स ने कहा, ‘बाजार से खरीदे गए डूरियन और कटहल का उपयोग करके हमने इनके अपशिष्ट (बायोमास) को सुपर-कैपेसिटर में बदल दिया, जिसका उपयोग बिजली को स्टोर करने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए शोधकर्ताओं ने ग्रीन इंजीनियरिंग पद्धति का उपयोग किया। इसका उपयोग आमतौर पर पानी को गर्म करने और फलों को सुखाने के लिए किया जाता है। इस विधि के जरिये शोधकर्ताओं ने डूरियन और कटहल को स्थिर कार्बन एयरोजेल में बदल दिया गया था। बता दें कि कार्बन एयरोजेल से अच्छे सुपर-कैपेसिटर बनाए जाते हैं।

एजेंसी

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