युगधारा फाउंडेशन का प्रथम वार्षिकोत्सव सम्पन्न

लखनऊ। युगधारा फाउंडेशन के वार्षिकोत्सव पर आयोजित हरी शंकर श्रीवास्तव स्मृति कवि सम्मेलन, पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता अंतराष्ट्रीय ग़ज़लकार संजय मिश्रा शौक़ ने की । जिसमें कई ख्यातिप्राप्त साहित्यकार रवि शुक्ल बीकानेर, कुँवर कुसुमेश, बृजेश शर्मा विफल , मीना भट्ट , सुनीता लुल्ला, प्रदीप देवी शरण भट्ट , वंदना श्रीवास्तव, कुमार सागर , संजीत सिंह, मानाराम बेनीवाल , हितेश शर्मा पथिक , सौरभ शुक्ला, मधुप श्रीवास्तव नर कंकाल, पंकज सिंह राहिब आदि उपस्थित रहे। आयोजन का सफल संचालन का दायित्व युवा गीतकार धीरज मिश्र ने संभाला। हितेश शर्मा पथिक ने वाणी वंदना से प्रारंभ कर कवि सम्मेलन का प्रारम्भ किया देश के कोने कोने से आये काव्य मनीषियों ने अपनी रचनायें सुनायी। रोहित रोज़, कुमार सागर, सौरभ शुक्ल जैसे युवा हस्ताक्षर मीना भट्ट कुंवर कुसुमेश, रवि शुक्ल, राहिब जी नरकंकाल जी सहस्त्रबुद्धे जी सुधाकर जी जैसे वरिष्ठ काव्य दिग्गजों ने अपनी रचनाओं से सम्मेलन का मान बढ़ाया।

दोहा, मुक्तक, गज़ल गीतिका, गीत, घनाक्षरी, सवैया, रुबाई जैसी साहित्यिक विधाओं में रचनायें प्रस्तुत की गयीं। ओज, श्रृंगार,हास्य व्यंग्य, सामाजिक सरोकारों में पगी रचनाओं ने लुभाया गुदगुदाया और सोचने पर मजबूर भी किया। इस अवसर पर अपराजिता सांसद श्रीमती अंजू बाला जी का विशिष्ट आतिथ्य प्राप्त हुआ। जिनके करकमलों द्वारा पुस्तकों का विमोचन सम्पन्न हुआ। विमोचित कृतियों में मशविरा रोज ये – कुमार रोहित कृत, काव्यरव – डॉ कुमुद श्रीवास्तव वर्मा कुमुदिनी, तूफान के मुकाबिल – हीरालाल यादव द्वारा कृत , दर्द का मुस्कुराना हुआ – प्रो विश्वम्भर शुक्ल द्वारा कृत, कतरा – कतरा पिघली हूँ – डॉ रजनी अग्रवाल द्वारा कृत , भाव निर्झरिणी – मानाराम बेनीवाल सिणधरी , पथिक अकेला राहें विरान – हरी शंकर श्रीवास्तव द्वारा कृत, मशीनों के शहर में – समीर भृगुवंशी द्वारा कृत हैं। यह सभी पुस्तकों युगधारा फाउंडेशन एवं प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हैं।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में फाउंडेशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह की अध्यक्षता आदरणीय प्रो.विश्वम्भर शुक्ल द्वारा की गई। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में आद प्रो उमा शंकर शुक्ल शितिकंठ जी, डॉ अरुण श्रीवास्तव अर्णव जी, महेश अस्थाना जी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विभिन्न रचनाकारों को साहित्य शिरोमणि ( मानद उपाधि ), साहित्य मार्तंड, साहित्य श्री, काव्यप्रज्ञ , साहित्य मनीषी, साहित्य प्रज्ञ सम्मान, साहित्य मनीषा, युगधारा साहित्य गौरव , साहित्य रत्न , साहित्य रत्नाकर ( मानद उपाधि ) गीतिका गौरव एवं गीतिका सौरभ सम्मान से सम्मानित किया गया।सम्मान समारोह में युगधारा फाउंडेशन द्वारा लगभग भारत वर्ष के 70 साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। हिन्दी भाषा के उत्थान एवं गीतिका रचनाधर्मिता पर अध्यक्ष आदरणीय प्रो.विश्वम्भर शुक्ल जी द्वारा अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए रचनाकारों का मार्गदर्शन किया।
युगधारा फाउंडेशन , उत्तरप्रदेश की एक साहित्यिक, सामाजिक, सांस्कृतिक सेवा सम्बंधित पंजीकृत समिति है, जिसके उद्देश्य निम्न हैं – सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक माध्यम से समाज सेवा। हिंदी साहित्य एवं लोक साहित्य को बढ़ावा।

नारी सशक्तिकरण, बालिका सशक्तिकरण। मासिक साहित्यिक , सांस्कृतिक गोष्ठी/ सेमिनार, विभिन्न प्रकार के आयोजन। वरिष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित करना एवं युवा साहित्यकारों को पुरस्कृत करना। शोधार्थी छात्रों को उनके शोध में सहायता करना। समाज के प्रति सजग प्रहरी का दायित्व निभाते हुए समाज को नवीन दिशा प्रदान करना। युवाओं में उत्तम चरित्र का निर्माण करते हुए उन्हें स्वावलंबी बनाना। लोगों को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना एवं निःशुल्क स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर इत्यादि का आयोजन। प्रकृति संरक्षण एवं वृक्षारोपण आदि। लखनऊ उत्तरप्रदेश से वरिष्ठ साहित्यकार प्रो विश्वम्भर शुक्ल, डॉ उमाशंकर शुक्ल, महेश प्रकाश अष्ठाना, सरवर लखनवी , कुँवर कुसुमेश, मध्यप्रदेश से डॉ अरुण श्रीवास्तव, मीना भट्ट , डॉ मीनू पाण्डेय आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन धीरज निर्मोही तथा संयोजन प्रणव मिश्र, संजीत सिंह, कुमार सागर, मनोज कुमार, आकाश अवस्थी, वंदना श्रीवास्तव , गीता अवस्थी अध्यक्ष, सौम्या मिश्रा महा सचिव द्वारा हुआ। युगधारा फाउंडेशन की ओर से संजीत सिंह द्वारा अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए राष्ट्रगान के उपरान्त अगले वर्ष फिर मिलने की कामना के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।

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