अयोध्या फैसले का काउंटडाउन शुरू, कॉलेजों में बनाई गईं 8 अस्थाई जेल

अयोध्या। मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ अयोध्या मुद्दे को लेकर जल्द फैसला सुना सकती है। ये पीठ 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर विचार कर रही है जिसने विवादित भूमि को निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और राम लल्ला के प्रतिनिधियों, बाल एकता के बीच समान रूप से बांटने का आदेश दिया था। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार एमएचए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अयोध्या मामले में संभावित फैसले से पहले सतर्क रहने की सलाह दी है। राज्य व केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी है। फैसले से पहले सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने निम्न कदम उठाए हैं।

-उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में अलग अलग कॉलेज में 8 अस्थाई जेल तैयार की गई हैं

-अयोध्या के भीतर आतंक विरोधी दस्ता (ATS), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) को तैनात किया गया है।

-उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस व प्रशासन समेत हर क्षेत्र के अधिकारियों की छुट्टियां 30 नवंबर तक के लिए रद्द कर दी हैं।

-इसके अलावा एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजरें गड़ाए हैं। यहां कोई भी ऐसा पोस्ट जो हिंसा फैलाए उसे पाए जाने पर एनएसए के  हवाले किया जाएगा। महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया की निगरानी के लिए स्पेशल टीम तैयार की है। 

-मेरठ में मुस्लिम धर्मगुरुओं ने ईमामों से लोगों के बीच शांति बनाए रखने की अपील करने को कहा है।

-इसके साथ ही प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के जज अशोक भूषण के घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। भूषण फैसला सुनाने वाली 5 जजों की पीठ में से एक है।

-राम जन्मभूमि न्यास ने श्री राम जन्मभूमि न्यास कार्यशाला में मंदिर के पत्थरों का निर्माण बंद कर दिया गया है।


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